धनतेरस
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मंगलवार
कृष्णपक्ष त्रयोदशी केॅ धनतेरस
मनाओल जाइत अछि। एहि दिन
धनवन्तरि आ यमराज केॅ पुजा के विशेष महत्व अछि। एहि दिन
देवताक वैद्य धनवन्तरि ऋृषि
सागर मंथन सॅ अमृत कलश लS के
प्रकट भेल छलाह।
पुजा
सामग्री-
दक्षिणावर्ती,
शंख,
केसर,
गंगाजल,
धुप-दीप,
लाल
वस्त्र,
कुमकुम,
स्फटीक
माला.
पुजा
विधि -
एहि
दिन घर के द्वारि पर एकटा दीपक
जड़ेवाक चाही,
जाहि
सॅ यमराज जी आरोग्य आयु प्रदान
करै छथि,
अपन
सामर्थ्यक अनुसार चाँदी,
सोना
व अन्य द्रव्य किनी,
एहि
दिन शंख के पुजा के विशेष महत्व
अछि.
विधि-
लाल
कपड़ा पर शंख राखि केसर सॅ सतिया
बना ली,
कुमकुम
सॅ तिलक कS ली
(तिलक
मंत्र-ऊँ
श्री क्लीं ब्लुं
सुदक्षिणावर्त शंखाय नम:),
धुप-दीप
देखा ली,
स्फटीक
माला सॅ दीयाबाती दिन तक 5
माला
(मन्त्र-ऊँ
हीं हीं हीं महालक्ष्मी धनदा
कुवेराय मम् गृह स्थिरो ही
ऊँ नम:)
जाप करी। पुन: दीयाबाती
दिन लाल वस्त्र मे शंख के लपेट दियौ।
निरंतरि उन्नति होयत।
छोटका दीयाबाती-
एहि
दिन श्री कृष्ण नरकासुर के
बध केलथि,
नरकासुरक
कालकोठरी स हजारो राजा-रानी
के आजाद केलनि,
इन्द्रक
कोप सॅ ब्रजवासीक रक्षा लेल
एहि दिन गोवर्धन पर्वत के धारण
केने छलाह,
ओहि
खुशी मे हम मैथिल छोट दियाबाती
मनाबैत छी,
गोबरक
ढेरी पर
दीपक
जड़बै छी।
दीयाबाती
ओना
त दियाबाती के कथा बहुत रास
अछि,
जाहि
मे----
- महामाया काली जी के क्रोध सॅ संसार के रक्षा लेल शंकर जी हुनक चरण लग सुइत रहला, तखन क्रोधोन्मत महामाया हुनक छाती पर चरण रखलखीन कि क्रोध शांत भ गेलनि, संसार नष्ट होइ स बचि गेल.
- मिथिला के पाहुन राम आ मैथिली सीता, रावण बध क अयोध्या एला के खुशी मे सब दियाबाती मनाबैत अछि.
पुजा
विधि-
दीयाबाती
के पुजा प्रदोष समय,
स्थिर
लग्न के विशेष महत्व अछि,
पुजा
के समय मोर पंख रखला सॅ लक्ष्मी
के प्राप्ती होइत अछि,
मुख्य
द्वार पर हल्दी और चौरक पिठार
सॅ स्वस्तिक बनेला सॅ निरोग
आ प्रसन्नता प्राप्त होइत
अछि,
दीयाबाती
दिन सरसों तेल के दीपक स काजर
बनेला सॅ भुत-प्रेत,
नजर-गुजर
सॅ रक्षा होइत अछि.
मंत्र-
ऊँ
महालक्षमये नम:
ऊँ
विष्णुप्रियाये नम:
