पटना : मैथिली सिनेमाक भविष्य बहुत उज्ज्वल छै, कारण एहि क्षेत्र मे युवा लोक सब बहुत गंभिरताक संग आबि रहल छथि।
:-मनोज श्रीपति(युवा निर्देशक)
मैथिली फिल्म बनबै मे पांच सात बताह अपन जिनगी कुरबान क' चुकल छथि मुदा एखन बहुत संभावना छै।बहुत बताह आगां एता।
मुदा, मूल प्रश्न छै जे फिल्मक भाषा की हो? मानक च चक्कर मे पडने कोनो भविष्य नहि अछि।
:-रवीन्द्रनाथ ठाकुर
मिथिला सॅ अलोपीत भ रहल पमरिया कला के भेल प्रदर्शन।
जन्मदिवस पर राजकमल चौधरीक स्मरण मनोज श्रीपतिक डाक्यूमेन्ट्री सॅ।
मैथिली रंगमंच आ एब्सर्ड नाटक तुमुल चर्चा मे
मैथिल समाज मे पाओल जाइ बला गप्पबाजी अपना मे एक कम्पलीट एब्सर्डिटी थिक। एकरा अपन शैली बना क' लिखल जाइबला नाटक सुंदर एब्सर्ड नाटक हैत।एहि क्रम मे इन्टरनेशनल स्तर पर अपनाओल जाइबला एब्सर्ड तकनीक के चिन्ता नाटककार कें नहि करबाक चाही।
:-दीपक गुप्ता
मैथिली बाल साहित्य पर विमर्श।
मैथिलीक विकास हुअ' देतै लोक?
ई तं एहन समाज अछि जतय लोक सब चीज क' सकैए मुदा मैथिलीक किताब कीनि क' नहि पढि सकैए!!
वाह रे आत्महंता समाज!
:-कमलेश
क्यो लेखक जं पुरस्कार के लेल लिखि रहल छथि, तं ओकरा सही साहित्य नहि कहल जा सकैत अछि। सही साहित्य अपन पाठकक लेल लिखल जाइत अछि।
:-शरदिन्दु चौधरी
