मैथिली साहित्यिक संस्था ‘साहित्यलोक’क मासिक काव्य गोष्ठी - नव मिथिला - maithili news Portal

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रविवार, 26 अक्टूबर 2014

मैथिली साहित्यिक संस्था ‘साहित्यलोक’क मासिक काव्य गोष्ठी

हे बेटी प्रेम आ’ फांस मे की अन्तर बुझू.
-अरुण पाठक
झारखंड (बोकारो) बीतल साँझ मैथिली भाषाक साहित्यकार दया कान्त झाक चीरा चास स्थित आवास पर प्रखर मैथिली साहित्यिक संस्था ‘साहित्यलोक’क मासिक काव्यगोष्ठीक आयोजन भेल। हिंदी व मैथिली के चर्चित साहित्यकार कुमार मनीष अरविन्दक अध्यक्षता मे संपन्न भेल एहि काव्यगोष्ठी मे अनुभवी साहित्यकारसभ सहित नवोदित रचनाकारसभ सेहो अपन उपस्थिति दर्ज करओलनि। काव्यगोष्ठीक आरंभ वरिष्ठ गीतकार विनय कुमार मिश्रक काव्यपाठ सँ भेल। श्री मिश्रक रचनासभक गेयता श्रोतासभकें मंत्रमुग्ध कऽ देलक। तदुपरांत उदय कुमार झा, भुटकुन झा, दया कान्त झा, अमन कुमार झा, सुनील मोहन ठाकुर, संजय कुमार झा इत्यादि कविगण अपन रचनासभक पाठ कयलनि। उक्त कविसभक काव्य पाठ विषय वैविध्य एवं संप्रेषनीयताक दृष्टि सँ विलक्षण रहल। नवोदित कवयित्री आकांक्षा सेहो अपन काव्य पाठक माध्यम सँ श्रोतासभकें आश्वस्त केलनि जे मैथिली साहित्यक नव पीढ़ी साहित्य सृजन के दायित्वक निर्वाह करबा मे सक्षम व सफल अछि। एहि रचनासभ पर अपन विचार प्रकट करैत अध्यक्ष श्री मनीष अरविन्द ऐहन गोष्ठीसभकें कार्यशालाक संज्ञा दैत कहलनि जे ऐहन काव्य-कार्यशालासभ नव साहित्यकारसभहक अंदर छुपल संभावनासभकें तराशब आ’ आकार देबा मे महत्वपूर्ण भूमिका निमाहैत अछि। ओ एहि बात पर खुशी जाहिर कयलनि जे काव्य गोष्ठी मे जतय एक दिस  महाकवि दया कान्त झाक रचनासभ मे पांडित्यपूर्ण साहित्यिक अभिव्यक्ति उभरिकऽ सोझा आयल, ओतहि दोसर दिस रचनाकारसभ समसामयिक विषयसभकंे सेहो स्पर्श कयलनि जाहिमे स्वच्छता अभियान सनक तात्कालिक विषय सेहो शामिल छल।

अध्यक्षक विशेष अनुमति सँ सुनील मोहन ठाकुर अपन कथा शीर्षक ‘गुलबिया बिहारि’क पाठ कयलनि। डाॅॅ सन्तोष कुमार झाक मनमोहक प्रस्तुति ‘हे धीया प्रेम आ’ फाँस मे की अन्तर बुझू/हम जे दै छी आहाँ के से जन्तर बुझू..’ के उपरांत श्री मनीष अरविन्द अपन धारधार कवितासभक पाठ कयलनि। वरिष्ठ शिक्षाविद् व समालोचक तुलानंद मिश्र, प्रखर युवा साहित्यकार व समालोचक शिव कुमार झा एवं उपस्थित अन्य साहित्य समीक्षकसभ रचनासभ पर अपन विचार प्रकट कयलनि। साहित्यलोक के दिस सँ कार्यक्रमक संचालन संयोजक डाॅ सन्तोष कुमार झा कयलनि।

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