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गुरुवार, 20 नवंबर 2014

मैथिली साहित्यिक संस्था ‘साहित्यलोक’क मासिक रचनागोष्ठी

मैथिली साहित्यिक संस्था ‘साहित्यलोक’क मासिक रचनागोष्ठी

‘प्रबल प्रेम मन हृदय सजा कऽ, झुकि कऽ करु वाणी सत्कार..’

- अरुण पाठक

झारखंड (बोकारो)। प्रखर मैथिली साहित्यिक संस्था ‘साहित्यलोक’क मासिक रचनागोष्ठी रविदिन (16 नवंबर 2014) साँझ मे हिन्दी आ’ मैथिली भाषाक यशस्वी साहित्यकार कुमार मनीष अरविन्द के सेक्टर 5 स्थित आवास पर आयोजित भेल। पटना सँ आयल मैथिली के वरिष्ठ कथाकार अशोक केर अध्यक्षता आ’ साहित्यलोकक संस्थापक महासचिव तुला नन्द मिश्रक संचालन में आयोजित एहि रचनागोष्ठी मे साहित्यकारसभ विभिन्न रसक रचना पाठ कय अपन सशक्त उपस्थिति दर्ज करओलनि। रचनागोष्ठीक आरंभ गीतकार विनय कुमार मिश्रक सरस्वती वंदना-‘प्रबल प्रेम मन हृदय सजा कऽ, झुकि कऽ करु वाणी सत्कार..’ सँ भेल। तदुपरांत भुटकुन झा मिथिला वर्णन-‘चुप्प किए छी राजू यौ, कनियो किछु तऽ बाजू यौ..’, सुनील मोहन ठाकुर ‘भूख’, राजीव कंठ ‘अल्लाह भगवान’, विजय शंकर मल्लिक ‘बारू दिबारी’, हरि मोहन झा मैथिली व्यंग्य कविता, सतीश चंद्र झा ‘ड्राइंग रूम मे लाफिंग बुद्धा’ शीर्षक कविता, कुमार मनीष अरविन्द ‘मतदाता गीत’, अमन कुमार झा मैथिली नाटक ‘सेनुर बिन अहिबाती के’ एकटा दृश्य, डाॅ सन्तोष कुमार झा व्यंग्य प्रधान कहानी ‘अतिथि देवो भव’, श्याम दरिहरे बदलैत परिवेश मे ग्राम्य जीवनक यथार्थ पर आधारित कहानी ‘एकटा गामक आत्महत्या’ तथा कथाकार अशोक प्रेम व मानवीय संवेदना सँ ओत-प्रोत कहानी ‘छुट्टीक एक दिन’क पाठ कयलनि। उक्त साहित्यकारसभक रचना विषय वैविध्य एवं संप्रेषनीयताक दृष्टि सँ आश्वस्त करैत छल जे मैथिली साहित्य मे सभ तरहक रचना भऽ रहल अछि। रचनागोष्ठी मे पठित रचनासभ पर अपन विचार प्रकट करैत अध्यक्ष श्री अशोक कहलनि जे ‘साहित्यलोक’ द्वारा आयोजित ई मासिक गोष्ठी बहुत प्रशंसनीय अछि। साहित्यलोकक गोष्ठी मे रचनापाठक संगहि ओकर समीक्षाक प्रावधान अछि जे रचनाकार के रचनासभकें परिमार्जित करैत अछि। एहि अभियान के आगू दूर धरि लऽ जयबाक जरूरति अछि। कथाकार श्याम दरिहरे अपन विचार व्यक्त करैत कहलनि जे मैथिली साहित्य मे नवका पीढ़ीक भागेदारी के लऽकऽ ओ थोरेक चिंतित छलाह, मुदा बोकारो आबि कऽ हुनक ई चिंता दूर भेल आ’ आब ओ आश्वस्त छथि जे मैथिली साहित्य मे नवका पीढ़ीक सक्रिय आ’ सशक्त भागेदारी अछि। ओ कहलनि जे साहित्यलोक द्वारा आयोजित मासिक रचनागोष्ठी एकटा कार्यशालाक रुप लऽ चुकल अछि। रचनाकारसभक प्रतिभा कें परिमार्जित करबा मे आ’ साहित्यिक माहौल के जीवंत बनाबऽ मे ‘साहित्यलोक’क योगदान प्रशंसनीय अछि। ई संस्था आओर आगू बढ़य से ओ कामना करैत छथि। रचनागोष्ठी मे गणेश चन्द्र झा, अश्विनी कुमार आदि उपस्थित छलाह। 



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