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शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014


गजल 

नवमिथिला नव गीत लिखत ग'
सभ आखर नवनीत लिखत ग'

जे बाजत से बाजत साफ 
पाँती पाँती भीत लिखत ग'

छातीकेँ ई देत पजारि 
दुनियाँकेँ सभ रीत लिखत ग'

मिठगर टा नै लीखत बात 
अवसर परने तीत लिखत ग'

मिथिला थिक राजीव महान 
सरिपहुँ मैथिल जीत लिखत ग'

२२२ २२१ १२१ 

@राजीव रंजन मिश्र

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