गजल
नवमिथिला नव गीत लिखत ग'
सभ आखर नवनीत लिखत ग'
जे बाजत से बाजत साफ
पाँती पाँती भीत लिखत ग'
छातीकेँ ई देत पजारि
दुनियाँकेँ सभ रीत लिखत ग'
मिठगर टा नै लीखत बात
अवसर परने तीत लिखत ग'
मिथिला थिक राजीव महान
सरिपहुँ मैथिल जीत लिखत ग'
२२२ २२१ १२१
@राजीव रंजन मिश्र